.....LEARING
and LIVING THE DEEN and FINDING THE BALANCE.....

Saturday, October 4, 2008

HAJ IN 1953




























BY R Raja Ahmad













3 comments:

फ़िरदौस ख़ान said...

सुब्हान अल्लाह...तस्वीरों को देखकर ही दिल को बेहद सुकून मिला...अल्लाह सबके नसीब में हज की ख़ुशी अता करे... जहांनुमा के लिंक के लिए शुक्रिया...

रज़िया "राज़" said...

सुबहानअल्लाह! आज आपने ऐसे वक़्त कमेन्ट लिखी है कि आपके ब्लोग पर आना ज़रूरी हो गया। और मैने वहां वो पाया जिस जगह पर मुज़े ख़ुदा ने तीन बार बुलाया है।
आपको ये सुनकर ख़ुशी होगी कि इस हज पर चौथी बार विदेश मंत्रालय से मेडीकल मिशन से मैं 22 अकतुबर को मक्का/मदिने की वही पाक ज़गह पर पहूंच रही हुं।
आपके कमेन्ट के लिये बहोत-बहोत शुक्रिया।
आपके ब्लोग पर बहोत ही सुकुन मिला। शुक्रिया।
आप दुआ करें कि आपके ब्लोग पर जो दुआ बज रही है वैसे ही मैं अपने इमान/फ़र्ज मं कामयाब रहुं और अल्लाह मेरा हज कुबुल फ़रमाए।

Hajar said...

Assalamualaikum,

Reminds me of the pictorials from the books and calendar I bought during Hajj.

Certainly, a lot has changed. :)

W'salam,
Hajar

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