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Tuesday, January 6, 2009

युद्ध या आतंक!!!!!!!

गज़ा की सर ज़मीन प बहता हुआ लहू
अश्कों में ढलके माह-ऐ-मुहर्रम से मिल गया
बिखरी हुई हैं लाशें शहीदों की चारसू
ये गम भी ऐ हुसैन तेरे गम से मिल गया

--शकील शम्सी

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